यहाँ इन भस्मों, स्वर्ण और हीरा भस्म के लाभ, और इनके सामूहिक उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है:
1. मुख्य भस्मों का परिचय और लाभ
आपकी लिस्ट में शामिल कुछ प्रमुख भस्मों के कार्य इस प्रकार हैं:
- मुक्तशुक्ति और प्रवाल पिष्टी: ये कैल्शियम के बेहतरीन स्रोत हैं। एसिडिटी, सीने में जलन और हड्डियों की कमजोरी को दूर करते हैं।
- त्रिवंग, वंग और नाग भस्म: ये मुख्य रूप से पुरुष और महिला प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health), मूत्र संबंधी समस्याओं और मधुमेह (Diabetes) में प्रभावी हैं।
- लौह और मण्डूर भस्म: शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाते हैं और एनीमिया (खून की कमी) को दूर करते हैं।
- यशद और ताम्र भस्म: रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाते हैं और त्वचा रोगों व लीवर के रोगों में सहायक हैं।
- अभ्रक भस्म (शतपुटी): यह श्वसन तंत्र, फेफड़ों की ताकत और याददाश्त बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है।
- रस सिंदूर और कामदुधा रस: ये शरीर के तापमान को नियंत्रित करते हैं और पुराने बुखार या पित्त दोष को शांत करते हैं।
- गिलोय सत्त्व: यह प्राकृतिक रूप से इम्यूनिटी बूस्टर और बुखार नाशक है।
2. स्वर्ण (Gold) और हीरा (Diamond) भस्म
इन दोनों को आयुर्वेद में 'महारत्न' माना जाता है:
- स्वर्ण भस्म (Gold Bhasma): यह शरीर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित (Rejuvenate) करती है। यह हृदय को मजबूती देती है, मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करती है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में शरीर को ताकत देती है।
- हीरा भस्म (Heera Bhasma): यह शरीर की सबसे सूक्ष्म नलिकाओं तक पहुँचकर काम करती है। यह ट्यूमर, नपुंसकता और पुरानी बीमारियों को जड़ से खत्म करने के लिए उपयोग की जाती है। यह वीर्य दोष और शारीरिक कमजोरी के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।
3. इन सबको एक साथ लेने के फायदे (Benefits)
जब इन भस्मों का एक संतुलित मिश्रण तैयार किया जाता है, तो इसके निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं:
- संपूर्ण शरीर का कायाकल्प (Vajikarana & Rasayana): यह मिश्रण शरीर को अंदर से फौलाद जैसा मजबूत बना सकता है।
- मेटाबॉलिज्म में सुधार: यह पाचन और अवशोषण (Absorption) की शक्ति को बढ़ाता है।
- पुरानी बीमारियों में राहत: यह पुरानी कमजोरी, तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की कमजोरी और हड्डियों के रोगों में रामबाण साबित हो सकता है।
- इम्यूनिटी का स्तर: शरीर की बीमारियों से लड़ने की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।
4. सावधानी और नुकसान (Potential Risks)
चेतावनी: भस्मों का प्रयोग बिना विशेषज्ञ की सलाह के करना खतरनाक हो सकता है।
- भारी धातु विषाक्तता (Heavy Metal Toxicity): यदि भस्म सही विधि से शुद्ध न की गई हो, तो यह किडनी और लीवर को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है।
- गर्मी (Heat): यह मिश्रण बहुत "उष्ण" (गरम) प्रकृति का हो सकता है, जिससे पेट में जलन या नकसीर (Nosebleed) जैसी समस्या हो सकती है।
- गलत खुराक: भस्मों की मात्रा रत्ती (mg) में तय की जाती है। थोड़ी सी भी अधिक मात्रा शरीर के अंगों के लिए हानिकारक हो सकती है।
- किडनी की समस्या: यदि पहले से किडनी की कोई बीमारी है, तो इतनी सारी भस्मों का भार किडनी सहन नहीं कर पाएगी।
निष्कर्ष और सुझाव
यह एक अत्यंत शक्तिशाली मिश्रण है जिसे आमतौर पर किसी अनुपान (जैसे शहद, मलाई या मक्खन) के साथ लिया जाता है।

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